
जांजगीर-चांपा | बिना वैध लाइसेंस के एलोपैथिक दवाओं का भंडारण और बिक्री कर मरीजों का इलाज करने के मामले में जांजगीर-चांपा जिले की विशेष अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। ग्राम बिर्रा निवासी अशोक कुमार बिस्वास (64) को दोषी ठहराते हुए न्यायालय ने 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त 6 माह के सश्रम कारावास का आदेश भी दिया गया है।
मामला वर्ष 2018 का है। औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने शिकायत के आधार पर ग्राम बिर्रा स्थित आरोपी के क्लीनिक की जांच की थी। जांच के दौरान क्लीनिक से 35 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिली थीं। टीम द्वारा वैध औषधि लाइसेंस और दवाओं के क्रय-विक्रय संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन आरोपी इन्हें प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद दवाओं को जब्त कर सीलबंद किया गया और मामला न्यायालय पहुंचा।
अब दूसरे जिलों में भी हो ऐसी जांच
जांजगीर-चांपा में हुई इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि क्या प्रदेश के अन्य जिलों में भी बिना वैध लाइसेंस क्लीनिक चलाने और एलोपैथिक दवाएं रखने या बेचने वालों की इसी तरह जांच हो रही है?जरूरत है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग प्रदेशभर में अभियान चलाकर ऐसे क्लीनिकों और दवा बिक्री केंद्रों की जांच करें। जहां नियमों का उल्लंघन मिले, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इससे न केवल अवैध दवा कारोबार पर रोक लगेगी, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
यह कार्रवाई किसी वैध चिकित्सक या लाइसेंसी मेडिकल स्टोर के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ होनी चाहिए। हाल के दिनों में जांजगीर-चांपा में भी विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण और दवाओं के नमूने लिए गए हैं। सवाल यही है — जांजगीर-चांपा में कार्रवाई हुई, अब प्रदेश के बाकी जिलों की बारी कब?



