कनाडा से व्यापार वार्ता टूटने पर ट्रंप के टैरिफ की आलोचना, अमेरिकी सांसद बोले- कारोबार पर पड़ेगा असर

अमेरिका के कुछ सांसदों ने चेतावनी दी है कि कनाडा के साथ व्यापार वार्ता के टूटने और 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने से कीमतें बढ़ेंगी, सीमा पार कारोबार प्रभावित होगा और अमेरिका तथा कनाडा के बीच सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों में अनिश्चितता और बढ़ेगी। कनाडा के कई उत्पादों पर अमेरिका की ओर से लगाए गए नए टैरिफ शनिवार से लागू हो गए, क्योंकि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। इसके जवाब में कनाडा ने भी समान स्तर के शुल्क लगाने की घोषणा की है।रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने कहा कि बार-बार शुरू और बंद होने वाली ये वार्ताएं उनके गृह राज्य मेन के कारोबारों के लिए लागत, जोखिम और अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन इन टैरिफ को लागू करता है, तो मेन के परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, क्योंकि ज्यादातर व्यवसायों के पास बढ़ी हुई लागत को अपने ग्राहकों तक ऊंची कीमतों के रूप में पहुंचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”कॉलिन्स ने बताया कि मेन हर साल कनाडा से लगभग 2 अरब डॉलर के गैर-पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है। उन्होंने कहा कि किसान, लॉब्स्टर मछुआरे और अन्य कारोबारी आपूर्ति श्रृंखला में कमी और कनाडा की जवाबी कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने वॉशिंगटन और ओटावा से फिर से बातचीत शुरू करने और एक निष्पक्ष समझौते तक पहुंचने की अपील की।सीनेट की वित्त समिति के सदस्य और डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने कहा कि ये टैरिफ वरमोंट और अन्य उत्तरी सीमा वाले राज्यों के व्यवसायों और किसानों के लिए ‘एक थप्पड़’ की तरह हैं। वेल्च ने कहा कि कई दशकों में बने व्यापारिक रिश्ते खतरे में पड़ रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस व्यापारिक टकराव को खत्म करने का रास्ता निकालने की अपील की।उन्होंने रिपब्लिकन सांसदों से कहा कि वे टैरिफ से जुड़े मामलों में कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों को फिर से मजबूत करें। उनके अनुसार, व्यापार नीति पर कांग्रेस ने कार्यपालिका को जरूरत से ज्यादा अधिकार दे दिए हैं। हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य प्रतिनिधि रिचर्ड नील ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि उन्होंने अंतिम समय में मांगें बदल दीं, जिससे अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों और व्यापारिक साझेदारों में से एक कनाडा के साथ चल रही बातचीत प्रभावित हुई।नील ने चेतावनी दी कि इस वार्ता के टूटने की आर्थिक कीमत अमेरिकी कर्मचारियों, व्यवसायों और उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ेगी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ओटावा ने बातचीत इसलिए रोक दी क्योंकि अमेरिका ने नई शर्तें रखीं, जिन्हें कनाडा ने अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह माना। कार्नी ने कहा कि वाशिंगटन ने ‘बहुत ज्यादा मांग की और बदले में बहुत कम पेशकश की।’ उन्होंने कहा कि कनाडा अपनी संप्रभुता, सांस्कृतिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण उद्योगों से समझौता नहीं करेगा।कनाडाई सरकार के अनुसार, अमेरिका लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी में था। इसके जवाब में ओटावा ने भी डॉलर के बदले डॉलर के हिसाब से जवाबी शुल्क लगाने और प्रभावित कर्मचारियों और कंपनियों को अतिरिक्त सहायता देने का वादा किया है।अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने इस गतिरोध के लिए कनाडा को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि ओटावा ने पहले चर्चा की गई शर्तों को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया और कुछ प्रतिबद्धताओं को वापस ले लिया या उनमें बदलाव कर दिया। इस विवाद के बाद कांग्रेस में फिर से ऐसी मांगें उठने लगी हैं कि राष्ट्रपति की ओर से लगाए जाने वाले टैरिफ पर विधायी समीक्षा अनिवार्य की जाए। कॉलिन्स और वेल्च दोनों ऐसे प्रस्तावों का समर्थन कर चुके हैं, जिनका उद्देश्य बड़े टैरिफ फैसलों पर कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करना है।ताजा टकराव से उत्तरी अमेरिका की आपस में जुड़ी अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ सकता है। विनिर्माण, कृषि, ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखलाएं अक्सर अमेरिका-कनाडा सीमा को कई बार पार करती हैं, तब जाकर तैयार उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव इन उद्योगों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।(इनपुट-आईएएनएस)

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