
कोरबा | गेरवाघाट में हसदेव नदी से रेत की अवैध निकासी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई बार समाचार प्रकाशित होने और वार्ड के जनप्रतिनिधियों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बावजूद कथित रेत तस्करों पर कार्रवाई का असर नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात 11 बजे से सुबह तक बेधड़क रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है।
25 सितंबर की सुबह सामने आए तस्वीरों और वीडियो में नदी क्षेत्र से रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलती दिखाई दे रही है। जीपीएस कैमरा रिकॉर्ड के अनुसार, एक तस्वीर सुबह 5:42 बजे की है, जबकि दूसरी तस्वीर में सुबह 6:13 बजे का समय दर्ज है। इससे सुबह तड़के तक रेत परिवहन जारी रहने के आरोप सामने आए हैं।

बेलचा से हुआ था किरण महतो पर जानलेवा हमला
रेत के अवैध कारोबार को लेकर गेरवाघाट और आसपास का क्षेत्र पहले भी हिंसक घटना का गवाह बन चुका है। राताखार निवासी किरण महतो को अवैध रेत उत्खनन रोकने पर बेलचा से सिर पर वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया था।
इतनी गंभीर घटना के बाद भी यदि नदी क्षेत्र में अवैध उत्खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो यह खनिज विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
वार्ड पार्षद रवि सिंह चंदेल का आरोप है कि, गेरवाघाट में रेत के अवैध उत्खनन का कई बार विरोध करने और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 22 सितंबर की सुबह उन्होंने 12 ट्रैक्टर पकड़कर विरोध जताया तथा सहायक खनिज अधिकारी राकेश वर्मा को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। वहीं, सिटी कोतवाली में संपर्क करने पर थाना प्रभारी ने इसे खनिज विभाग का मामला बताते हुए कहा कि खनिज अधिकारी से संपर्क करें, यह हमारा मामला नहीं है। पार्षद ने सवाल उठाया कि बार-बार शिकायत और विरोध के बावजूद अवैध उत्खनन पर रोक क्यों नहीं लग रही है।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कारोबार?
वार्ड के जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों और लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद रेत की कथित चोरी जारी रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। सवाल यह है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों से लगातार रेत का उत्खनन और परिवहन किसके संरक्षण में हो रहा है? जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं है या कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं और हसदेव नदी में कथित अवैध उत्खनन पर कब रोक लगती है।



