
व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ का हवाला, निर्णय वापस लेने या पुनर्विचार की मांग
कोरबा | ₹2,000 से अधिक के UPI व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के प्रावधान को लेकर व्यापारिक संगठनों में विरोध शुरू हो गया है। जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इसे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने वाला कदम बताते हुए शुक्रवार को कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
चैंबर प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में कहा कि UPI आज देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक बड़ी संख्या में कारोबारी तेज और सुविधाजनक भुगतान के लिए UPI का उपयोग कर रहे हैं।
चैंबर का तर्क है कि ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान व्यापारियों की लागत बढ़ा सकता है। भले ही यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूल नहीं किया जाए, लेकिन लेन-देन से जुड़ी लागत का आर्थिक प्रभाव अंततः व्यापारी पर पड़ने की आशंका है।
छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा असर
चैंबर ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों को पहले से बैंकिंग, कर्मचारियों, संचालन और अन्य व्यावसायिक खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत उनके लिए चिंता का विषय बन सकती है।
चैंबर प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री से मांग की कि UPI जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए भी शून्य-MDR के दायरे में रखा जाए। साथ ही ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित/लागू 0.4 प्रतिशत MDR के प्रावधान को वापस लेने अथवा उस पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।



