
कोरबा | गांव को नशामुक्त बनाने की जिम्मेदारी अब महिलाएं अपने कंधों पर उठाती नजर आ रही हैं। शराब के अवैध कारोबार से परेशान महिलाएं कभी परिवार को समझा रही हैं, तो कभी पुलिस के अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। सवाल यह है कि जब महिलाएं नशे के खिलाफ मोर्चा संभाल सकती हैं, तो स्थानीय पुलिस की सक्रियता कहां नजर आ रही है?
ऐसा ही मामला शनिवार को बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम जवाली के आश्रित ग्राम दुलीकछार से सामने आया। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले से मुलाकात कर गांव में शराब के अवैध कारोबार की शिकायत की।
महिलाओं ने बताया कि गांव में कच्ची शराब की बिक्री से माहौल खराब हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। नशे की गिरफ्त में बच्चे, युवा और बुजुर्ग आ रहे हैं। कुछ बच्चों के स्कूल छोड़ने की बात भी महिलाओं ने अधिकारियों के सामने रखी।
महिलाओं का आरोप है कि नशे की हालत में कुछ लोग महिलाओं पर छींटाकशी करते हैं, जिससे गांव में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उन्होंने अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने और कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
एसपी कार्यालय पहुंचीं महिलाएं, अब स्थानीय पुलिस की बारी
महिलाओं ने अपनी समस्या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले के सामने रखी। पुलिस अधिकारियों से सहयोग की उम्मीद लेकर पहुंचीं महिलाओं को अब कार्रवाई का इंतजार है।
कोरबा पुलिस अधीक्षक के स्तर पर शिकायतों को सुनने और लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की पहल की सराहना की जा सकती है। लेकिन सवाल स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर भी उठता है। यदि गांव में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है, तो उस पर प्रभावी कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई।
सवाल यही है कि गांव की महिलाएं नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही हैं, लेकिन अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान कब शुरू होगा?
अब देखना होगा कि महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस गांव में अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है और दुलीकछार को नशामुक्त बनाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।



