
बरसात में रोक के बावजूद हसदेव नदी में उतरीं रेत से लदी गाड़ियां, खबरों और विरोध के बाद भी कार्रवाई नहीं; अब कथित बैठक को लेकर उठे सवाल
कोरबा | गेरवाघाट में हसदेव नदी से अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बरसात में रेत उत्खनन पर रोक के बावजूद पूरी रात नदी घाट में गाड़ियों की आवाजाही और रेत निकाले जाने का आरोप है। बुधवार सुबह सामने आई तस्वीर में रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां घाट से निकलती दिखाई दे रही हैं।
मामला अब इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गेरवाघाट में रेत उत्खनन को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। स्थानीय लोग विरोध जता रहे हैं और जनप्रतिनिधि भी मामले को लेकर आवाज उठा चुके हैं। इसके बावजूद यदि रातभर घाट में गाड़ियां उतर रही हैं तो सवाल सीधे प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई पर उठता है।
जनप्रतिनिधि ने गाड़ियां रुकवाईं, फिर भी रात में दोबारा शुरू हुआ खेल
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह वार्ड के एक जनप्रतिनिधि ने अपने कुछ लोगों के साथ घाट पहुंचकर रेत से भरी गाड़ियों को रुकवाया था। इसके बाद भी रात में रेत उत्खनन दोबारा शुरू होने की बात सामने आई है।
यानी दिन में विरोध और कार्रवाई की मांग, लेकिन रात होते ही फिर वही गतिविधि- आखिर इतनी बेखौफी किसके भरोसे ?
शाम 4 बजे ‘मंथन’ की चर्चा, क्या आपत्ति खत्म कराने की तैयारी?
इस पूरे मामले के बीच सूत्रों से एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आज शाम करीब 4 बजे कुछ लोगों के बीच बैठक कर ‘मंथन’ किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को घाट पर आपत्ति जताने वाले जनप्रतिनिधि के भी इस बैठक में शामिल होने की बात सामने आई है।
सूत्रों का दावा है कि कथित बैठक में आगे रेत का काम बिना विरोध और बिना रुकावट कैसे चले, इसे लेकर चर्चा हो सकती है। ‘किसे क्या देना है’ जैसी बात तय किए जाने की चर्चा भी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंथन अगर हुआ तो सवाल भी उठेंगे
यदि वास्तव में ऐसी कोई बैठक होती है तो सवाल उठना तय है कि उसका उद्देश्य क्या है? क्या रेत उत्खनन पर आपत्ति खत्म कराने की कोशिश होगी या फिर कोई और सहमति बनाई जाएगी?
सबसे अहम सवाल प्रशासन से है— जब घाट की गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है, फोटो-वीडियो सामने हैं, स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं और जनप्रतिनिधि भी गाड़ियां रुकवा चुके हैं, तो फिर कार्रवाई आखिर क्यों नहीं?
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ हसदेव नदी में प्रतिबंध के बावजूद कथित रेत उत्खनन का आरोप है, तो दूसरी तरफ शाम को होने वाली कथित बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में प्रशासन चाहे तो मौके पर तत्काल जांच कर पूरे मामले की वास्तविकता सामने ला सकता है।
अब सवाल सिर्फ रेत चोरी का नहीं, बल्कि यह भी है कि लगातार सामने आ रही शिकायतों और तस्वीरों के बाद जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? और अगर आज शाम कथित ‘मंथन’ होता है, तो उसमें आखिर क्या तय होता है?



