गेरवाघाट में रेत के खेल पर पार्षद का बड़ा आरोप; कोतवाली से खनिज विभाग तक कटघरे में!‎‎

रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन का आरोप, कार्रवाई के बजाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के सवाल‎‎

कोरबा | गेरवाघाट में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मामला एक बार फिर गरमा गया है। स्थानीय पार्षद रवि सिंह चंदेल ने अवैध रेत उत्खनन को लेकर कोरबा कोतवाली प्रभारी प्रेमचंद साहू और खनिज विभाग के सहायक संचालक राकेश वर्मा सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षद का आरोप है कि लगातार शिकायतों और विरोध के बावजूद गेरवाघाट में रेत का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।

‎‎पार्षद के मुताबिक, क्षेत्र में रात के अंधेरे में रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार विभागों की निगरानी के बावजूद यह गतिविधि कैसे जारी है? शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।‎‎

ज्ञापन दिए, विरोध किया, फिर भी नहीं रुका रेत का खेल‎

पार्षद रवि सिंह चंदेल का कहना है कि गेरवाघाट में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ वे कई बार आवाज उठा चुके हैं। कलेक्टर को भी कई बार ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।‎‎

पार्षद ने बताया कि 22 सितंबर की सुबह उन्होंने विरोध स्वरूप 12 ट्रैक्टरों को रोका था। इसके बाद सहायक खनिज अधिकारी राकेश वर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। सिटी कोतवाली से संपर्क करने पर भी उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिलने का आरोप है।‎‎

पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका पर उठाए सवाल

‎‎पार्षद ने कोतवाली प्रभारी प्रेमचंद साहू और खनिज विभाग के सहायक संचालक राकेश वर्मा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जब अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों द्वारा प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?‎‎

यदि मामला खनिज विभाग के अधिकार क्षेत्र का है, तो अवैध उत्खनन रोकने के लिए विभाग क्या कदम उठा रहा है? वहीं, अवैध परिवहन और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर पुलिस की क्या भूमिका है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों से अपेक्षित है।

‎‎पहले हमला, अब भी जारी अवैध उत्खनन के आरोप‎गेरवाघाट में रेत के अवैध कारोबार को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में किरण महतो पर फावड़े से हमला किए जाने की घटना भी सामने आई थी। इसके बावजूद पार्षद का आरोप है कि क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है।‎‎

बड़ा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कारोबार?‎गेरवाघाट में लगातार हो रही कथित अवैध गतिविधियों ने प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्षद के आरोपों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

‎‎सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायतें, ज्ञापन और विरोध के बावजूद यदि अवैध उत्खनन जारी है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?‎‎

यह खबर उपलब्ध विवरण और पार्षद के आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।‎‎‎‎‎‎‎‎‎

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