
मुड़ापार के दो कब्रिस्तानों पर विवाद, पास्टर ने कलेक्टर से की जांच की मांग
कोरबा | मुड़ापार हेलीपैड के पास मसीह समाज के अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन द्वारा आवंटित दो कब्रिस्तानों की जमीन पर कब्जे और दफन के नाम पर राशि वसूली का मामला सामने आया है। इस संबंध में इमलीडुगु निवासी पास्टर रघुवीर सिंह ने कलेक्टर कोरबा को शिकायत सौंपकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में बताया गया है कि कोरबा जिला प्रशासन ने मसीह समाज के लोगों के अंतिम संस्कार एवं शव दफन के लिए मुड़ापार हेलीपैड के पास दो कब्रिस्तानों की भूमि उपलब्ध कराई थी। इसका उद्देश्य मृतक के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक और निःशुल्क दफनाने की सुविधा देना था। आरोप है कि कोरबा चर्चेस वेलफेयर एसोसिएशन (KCWAS) नामक संस्था द्वारा उक्त दोनों जमीनों पर अपना मालिकाना हक जताते हुए बाउंड्रीवाल कराकर ताला लगा दिया गया है।

दफन के नाम पर 500 से 3000 रुपये तक वसूली का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को दफन की अनुमति के लिए संबंधित संगठन के पास आवेदन करना पड़ता है। साथ ही, अलग-अलग लोगों से 500, 1500 और 3000 रुपये तक लिए जाने की शिकायत भी की गई है। शिकायत के अनुसार, संगठन के पंजीकृत सदस्य नहीं होने, बैठकों में नियमित रूप से शामिल नहीं होने या मासिक राशि जमा नहीं करने का हवाला देकर कुछ परिवारों को दफन की अनुमति देने में परेशानी होती है।
इससे मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के दौरान मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कलेक्टर से पांच बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग:
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से दोनों कब्रिस्तानों की भूमि के स्वामित्व, आवंटन की शर्तों और वर्तमान उपयोग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित संस्था के पदाधिकारियों और पंजीकृत पक्षों के बयान दर्ज कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है।
शिकायत में मांग की गई है कि यदि जांच में भूमि पर अनुचित एकाधिकार या अवैध वसूली की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए दोनों कब्रिस्तानों को आम समाज के लिए स्वतंत्र और सुलभ कराया जाए। किसी भी मृतक परिवार को संस्था की सदस्यता, बैठक में उपस्थिति या मासिक राशि जमा नहीं करने के आधार पर दफन की सुविधा से वंचित नहीं किया जाए।
शिकायत की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, संबंधित तहसीलदार और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है। अब मामले में जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।



