
96 गांवों में खरीफ फसल की गिरदावरी बाकी, पीवी एप से काम कराने के फैसले पर बढ़ा विवाद
जिले में खरीफ फसल की गिरदावरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पटवारियों के बाद अब ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने भी पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने से इनकार कर दिया है। सोमवार को उपसंचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्होंने अतिरिक्त कार्य से मुक्त नहीं किए जाने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।
दरअसल, राज्य शासन हर साल पटवारियों के माध्यम से फसलों का भौतिक सत्यापन कराता है। इसके जरिए खसरा वार यह रिकॉर्ड तैयार किया जाता है कि किस जमीन पर कौन सी फसल लगाई गई है। पहले पटवारी अपनी आईडी से ऑनलाइन फसल की एंट्री करते थे, लेकिन 18 सितंबर को पीवी एप से गिरदावरी करने का निर्देश जारी किया गया। पटवारियों ने तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का हवाला देते हुए काम करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद जिन गांवों में गिरदावरी बाकी है, वहां कृषि विभाग के मैदानी अमले को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए। इस फैसले से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नाराज हैं। उनका कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग का मूल कार्य है और कृषि विभाग के कर्मचारियों पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां हैं।
पहले से कई जिम्मेदारियां, ऊपर से गिरदावरी का अतिरिक्त बोझ
कृषि विस्तार अधिकारियों के मुताबिक, वे वर्तमान में फसल निरीक्षण, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन, फसल सुरक्षा, कृषि आदानों की मांग और विभिन्न सर्वेक्षणों का काम कर रहे हैं। इसके अलावा ऑनलाइन जीटी सर्वे का कार्य भी जारी है। ऐसे में राजस्व विभाग का अतिरिक्त काम सौंपना उचित नहीं है।
इसी के विरोध में अधिकारियों ने उपसंचालक कृषि कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और गिरदावरी के अतिरिक्त कार्य से मुक्त करने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
96 गांवों में गिरदावरी बाकी, फसल रिकॉर्ड पर असर की आशंका
जिले में रिकॉर्ड के अनुसार कुल 712 गांव हैं, जिनमें से 96 गांवों में खरीफ फसल की गिरदावरी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इन्हीं गांवों की जिम्मेदारी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को सौंपने की बात कही गई है।
गिरदावरी पूरी नहीं होने से खेतों में बोई गई फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार होने में देरी हो सकती है। ऐसे में पटवारियों और कृषि विस्तार अधिकारियों के विरोध के बीच अब गिरदावरी का काम पूरा कराने की जिम्मेदारी प्रशासन के सामने चुनौती बन गई है।



