
कोरबा: राताखार के गेरवाघाट में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर बुधवार रात दो पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ। घाट पर दबदबा कायम करने की होड़ में शुरू हुई कहासुनी गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गई। मौके का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस पूरे खेल पर जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ रही?
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से गेरवाघाट में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर शिकायतें किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद गतिविधियां जारी रहने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि घाट पर गाड़ी चलाने को लेकर दो पक्षों में विवाद भड़का। आरोप है कि एक पक्ष ने दूसरे व्यक्ति को वहां गाड़ी नहीं चलाने का दबाव बनाया, जिसके बाद मामला बिगड़ गया।
गेरवाघाट पर वर्चस्व की जंग, खनिज विभाग की निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि घाट पर प्रतिबंध के बावजूद भी अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, तो खनिज विभाग की निगरानी आखिर कहां है? क्या विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं, या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है? अवैध कारोबार और कथित मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
घटना के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता, तो विवाद और गंभीर रूप ले सकता था।
रेत का अवैध कारोबार या विभागीय लापरवाही? जवाब कौन देगा?
गेरवाघाट की घटना केवल दो पक्षों के बीच विवाद का मामला नहीं है। यह अवैध उत्खनन पर निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करती है।
अब खनिज विभाग को स्पष्ट करना चाहिए—
गेरवाघाट में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगाम कब लगेगा?
क्या घाट से जुड़े कथित सिंडिकेट और संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विवाद में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और गेरवाघाट में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की जांच कर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि खनिज विभाग सिर्फ कागजों पर कार्रवाई दिखाता है या गेरवाघाट पहुंचकर जमीनी हकीकत की जांच भी करता है।



