
कोरबा | प्रदेश में सर्पलोक के नाम से चर्चित हो रहा कोरबा अब दुर्लभ और जहरीले सांपों की 25 प्रजातियों का बसेरा बन गया है। जिले में प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल वन क्षेत्र के कारण अलग-अलग इलाकों में सांपों की मौजूदगी लगातार सामने आ रही है।
वन विभाग और रेस्क्यू टीमों के अनुसार, कोरबा में हर साल तीन हजार से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा रहा है। इस वर्ष साढ़े 9 महीने में करीब 2650 सांप पकड़े जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या जहरीले सांपों की है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन रोजाना करीब 40 सांपों के रेस्क्यू की बात सामने आई है।

रेस्क्यू टीम के मुताबिक, इस वर्ष अब तक पुलिस लाइन सहित विभिन्न स्थानों से 10 से अधिक जहरीले सांपों को भी सुरक्षित पकड़ा गया है। बढ़ती संख्या को देखते हुए लोगों को सांपों के प्रति जागरूक रहने और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
इस वर्ष करीब 500 सर्पदंश के मामले सामने आने की जानकारी है, जिनमें 19 लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें अधिकांश मौतें जहरीले सांपों के काटने के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से हुई हैं।

जानकारों के अनुसार, कोरबा में 25 प्रजातियों के सांपों की मौजूदगी यहां की जैव-विविधता और मजबूत इकोसिस्टम का संकेत है। सांप चूहों और अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल चिकित्सकीय उपचार लेना बेहद जरूरी है।



