
दीपक धामेचा ने लगाया झूठी एफआईआर दर्ज कराने और परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
कोरबा | नगर निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पाण्डेय और कोतवाली थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना के खिलाफ दीपक धोमचा ने गंभीर आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कराने, पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने तथा स्वयं और अपने परिवार को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

दुकान में कचरा फेंकने और जुर्माने को लेकर विवाद का आरोप
शिकायतकर्ता दीपक धामेचा के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को नगर निगम के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी उनके प्रतिष्ठान राहुल बैग हाउस, पावर हाउस रोड, कोरबा पहुंचे थे। आरोप है कि दुकान के पास पड़े कचरे को हटाने को लेकर विवाद हुआ और उनसे कथित तौर पर एक हजार रुपये जुर्माना वसूलने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जुर्माना नहीं देने पर निगम आयुक्त द्वारा दुकान में कचरा फेंकने और दुकान सील करने की धमकी दी गई।

टीआई पर प्रभाव में आकर झूठी एफआईआर दर्ज कराने का आरोप
दीपक धामेचा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि नगर निगम आयुक्त के प्रभाव में आकर कोतवाली थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना द्वारा उनके और उनके भाई के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई। उनका दावा है कि संबंधित घटना का वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने के बावजूद उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। उन्होंने शिकायत में यह भी कहा है कि संबंधित वीडियो और बातचीत की रिकॉर्डिंग जांच के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है।
जमानत मिलने के बाद भी थाने बुलाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त 2026 को न्यायालय से जमानत मिलने के बाद भी दीपक को 6 अगस्त को कोतवाली थाने बुलाए जाने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें फोन पर ऐसी बातें कही गईं, जिनसे उन्हें जेल जाने का डर हुआ। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद वह कोरबा छोड़कर बाहर चले गए और लगभग एक माह से अधिक समय तक अपने परिवार से दूर रहे।
शिकायत में 16 अगस्त 2026 को कोरबा आने के दौरान पुलिस द्वारा उन्हें पकड़ने का प्रयास किए जाने तथा उनकी कार को क्षतिग्रस्त किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इन घटनाओं के संबंध में उन्होंने संबंधित रिकॉर्डिंग, दस्तावेज और वाहन की क्षति के फोटो साक्ष्य के रूप में संलग्न करने का उल्लेख किया है।
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का उल्लेख
दीपक धोमचा ने शिकायत में बताया है कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में WPCR No. 529/2026 के तहत याचिका प्रस्तुत की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले में संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएं, उपलब्ध वीडियो एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराई जाए तथा 31 जुलाई 2026 को दर्ज कथित झूठी एफआईआर के संबंध में निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

शिकायत के साथ पूर्व में की गई शिकायतों, एफआईआर एवं चालान से संबंधित दस्तावेजों, वाहन की क्षति के फोटो और रिकॉर्डिंग से जुड़े साक्ष्य संलग्न किए जाने का उल्लेख है।



