
महापौर निवास के सामने कांग्रेस का प्रदर्शन, पार्षद रवि सिंह चंदेल ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही पर उठाए सवाल
कोरबा | राताखार वार्ड में नगर निगम द्वारा करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे सीसी रोड निर्माण को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। सड़क की गुणवत्ता, नाली निर्माण नहीं होने और निर्धारित चौड़ाई कम किए जाने के आरोपों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने विरोध प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मुकेश राठौर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह महापौर संजू देवी राजपूत के निवास के सामने पहुंचे और सड़क पर झाड़ू लगाकर निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध जताया।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब सड़क निर्माण पर इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो फिर नाली निर्माण की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही और सड़क की चौड़ाई कम किए जाने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं? पार्टी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मापदंडों और सरकारी राशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
पार्षद रवि सिंह चंदेल ने उठाए सवाल
राताखार क्षेत्र के कांग्रेस पार्षद रवि सिंह चंदेल ने भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता और स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में केवल सड़क बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, निर्धारित चौड़ाई और जल निकासी की व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि नाली निर्माण किए बिना सड़क बनाई जा रही है या सड़क की चौड़ाई निर्धारित मापदंडों से कम रखी गई है, तो इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पार्षद की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि निर्माण कार्य की स्वीकृत ड्राइंग, तकनीकी प्राक्कलन, कार्यादेश और मौके पर किए जा रहे निर्माण का मिलान कराया जाए, ताकि स्पष्ट हो सके कि काम तय मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने संबंधित निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार के पहले से ब्लैकलिस्टेड होने का दावा भी किया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित कंपनी की स्थिति, ठेका देने की प्रक्रिया और निर्माण कार्य की पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कांग्रेस ने मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए, वास्तविक चौड़ाई का माप लिया जाए और नाली निर्माण की स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही, जांच में अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
करीब 2 करोड़ रुपये की लागत वाले इस निर्माण कार्य को लेकर अब नगर निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मुख्य सवाल यही है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के अनुरूप हो रहा है और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?


